सोल: दक्षिण कोरिया ने अपनी उन्नत तकनीक और प्राचीन परंपराओं के अद्भुत मिलन का प्रदर्शन करते हुए दुनिया के पहले रोबोट भिक्षु 'गाबी' को आधिकारिक रूप से बौद्ध धर्म में शामिल किया है। बुधवार, 07 मई 2026 को राजधानी सोल के प्रतिष्ठित जोग्येसा मंदिर (Jogyesa Temple) में एक भव्य दीक्षा समारोह आयोजित किया गया। 130 सेंटीमीटर ऊंचे इस ह्यूमनॉइड रोबोट ने पारंपरिक मठवासी वस्त्र धारण कर अन्य भिक्षुओं के साथ प्रार्थना सभा में भाग लिया, जिसे देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु और तकनीक प्रेमी उमड़ पड़े।
परंपरा और नियमों का डिजिटल संस्करण
चीनी कंपनी 'यूनिट्री रोबोटिक्स' द्वारा विकसित इस 'जी1' मॉडल के रोबोट को 'सुग्ये' नामक पवित्र अनुष्ठान के माध्यम से दीक्षा दी गई।
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नया नाम और प्रतीक: दीक्षा के दौरान इसे 'गाबी' नाम दिया गया। चूँकि रोबोट की त्वचा पर धूप से निशान (योनबी) बनाना संभव नहीं था, इसलिए उसकी भुजा पर प्रतीकात्मक रूप से कमल के फूल का स्टीकर लगाया गया और 108 मोतियों की माला पहनाई गई।
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रोबोटिक पंचशील: इस अवसर पर रोबोटिक भिक्षु के लिए बौद्ध धर्म के पांच नैतिक नियमों (Precepts) को विशेष रूप से संशोधित किया गया। इनमें अन्य संपत्तियों को नुकसान न पहुँचाना, ऊर्जा का संरक्षण करना (अनावश्यक चार्जिंग से बचना) और मानवीय निर्देशों का पालन करना शामिल है।
बुद्ध पूर्णिमा और सार्वजनिक अवकाश
दक्षिण कोरिया में इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा (सोक्का तांसिनिल) 24 मई को मनाई जाएगी।
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उत्सव की तैयारी: सरकार ने इस ऐतिहासिक पहल के साथ ही 25 मई 2025 (सोमवार) को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है, ताकि नागरिक 'कमल लालटेन उत्सव' का आनंद ले सकें।
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भविष्य की भूमिका: 'गाबी' का उपयोग मुख्य रूप से जोग्येसा मंदिर में आगंतुकों को बौद्ध शिक्षाओं के बारे में शिक्षित करने और प्रार्थनाओं के दौरान मंत्रोच्चार में सहायता करने के लिए किया जाएगा।
यह कदम न केवल दक्षिण कोरिया की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भविष्य में धर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) किस प्रकार एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 'गाबी' जैसे रोबोट आने वाले समय में युवाओं को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम साबित होंगे।