अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीदों पर पानी फिरने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बार फिर अस्थिरता का माहौल पैदा हो गया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिससे पश्चिमी एशिया में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है। ट्रंप के इस सख्त रुख के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया और क्रूड ऑयल के दाम 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गए।
इसका सीधा और विनाशकारी असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। सोमवार सुबह जैसे ही दलाल स्ट्रीट खुला, चारों तरफ बिकवाली का माहौल छा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, वहीं निफ्टी में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर निवेशकों की करीब 4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई। सुबह 9:54 बजे तक सेंसेक्स 1.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,269.42 के स्तर पर संघर्ष कर रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का ईरान के 'एनरिच्ड यूरेनियम' पर कब्जे का संकेत देना और शांति वार्ता का विफल होना निवेशकों को डरा रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए राजकोषीय घाटे का खतरा बढ़ाती हैं। इसके अलावा, घरेलू बाजार में टाइटन और सेनको गोल्ड जैसे प्रमुख शेयरों में आई गिरावट ने रही-सही कसर पूरी कर दी, जिससे छोटे और बड़े सभी निवेशकों को भारी चपत लगी है।